विकास जब हो रहा है तो जेलों की संख्या बढ़ाने की क्या जरूरत-राष्ट्रपति मुर्मू।

बिलासपुर- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जजों और वाइस चांसलर्स की एक मीटिंग बहुत सारे व्यवहारिक पहलुओं ओर चर्चा ,बिना पढ़े व्यवहारिक मुद्दों पर खुलकर विचार रखे कहा न्यापालिका, विधयिका और कार्यपालिका को को कुछ अच्छा करने के लिए एकसाथ होना पड़ेगा ,गरीब परिवार से आई मुर्मू ने जमीनी सचाई को मीटिंग में रखा कहा ,जेलों में बढ़ते ओव्हर क्राऊड पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज और जेल बढ़ाने की बात हो रही जब विकास हो रहा है तो जेलों की संख्या बढ़ाने की क्या जरूरत है, सालसा के कार्यो सराहना करते हुए मुर्मू ने कहा कि चीफ जस्टिस मिश्रा के समय पांच हजार मामलो का निपटारा करके छोटे गरीब लोगों को रहत दी गई ,राष्ट्रपति ने कहा छोटे मामलो के कारण जेल में बंद अपने अधिकारों से अनिभिज्ञ लोग सजा के बाद भी सजा काटते है उनके लोगो अपना घर ,खेत बिकने के डर से उनको नही छुड़ाते, अपने गांव का जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टर ,शिक्षक, और वकील को लोग भगवान मानते है,पहले डॉक्टर को भगवान मानते थे अब नही , क्योंकि लोग इनके पास परेशानी में जाते है, महाविद्यालयों पर मुर्मू नेकहा की यंहा बैठे लोगों को गंभीरता से अपने क्षेत्र में काम करना चाहिए।जरूरतमंदो तक मदद पहुंचनी चाहिए, राष्ट्रपति मुर्मु ने ये सब इतने सरल शब्दों में कही की समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता साफ नजर आई ,बड़े पद पर बैठा व्यक्ति इतनी साफगोई से बात बिना किसी लच्छेदार भाषा के अपनी बात कहेगा तो आम आदमी प्रभावित होगा ही क्योंकि बड़े पदों पर बैठने वाले व्यक्ति से आम जन यही उम्मीद करता है कि काम की बात हो और उसका असर भी दिखे।मुर्मु ने जो बातें सादगी से कही वो ठोस जमीनी हकीकत और सुधार की दिशा में सार्थक पहल है।

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