एवीएम के छात्र रूबरू हुए “इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा” से ।

बिलासपुर-कोनी क्षेत्र में स्थित आधारशिला विद्या मंदिर मे “भारतीय जन नाट्य संघ” (इप्टा) के महासचिव शैलेन्द्र कुमार अपने सहयोगी साथी राकेश वेदा,ख्वार सिंह, अरूण , निसार अली, विनोद कोष्ठी,वर्षा, साक्षी शर्मा, संध्या, मधुकर गोरख,सचिन शर्मा, मुरली मनोहर, डॉ.अनीश कुमार, ओम पांडा के साथ विद्यालय में उपस्थित होकर बच्चों को इप्टा का उद्देश्य व इतिहास बताया। आजादी के 75वें साल के मौके पर निकलने वाली “ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” असल में स्वतंत्रता संग्राम के गर्भ से निकले स्वतंत्रता- समता- न्याय और बंधुत्व के उन मूल्यों की तलाश की कोशिश है जो आजकल नफरत, वर्चस्व और दंभ के तुमुल कोलाहल में डूब गए हैं उन्होंने बच्चों के साथ हुई परिचर्चा के दौरान शुरुआत में बताया कि मनुष्य एक जिज्ञासु प्राणी है एवं उसके मन में हमेशा कोई ना कोई प्रश्न उठते ही रहते हैं “हम अपनी जिंदगी से क्या चाहते हैं?” जब मनुष्य ने यह प्रश्न किया तब पता चला सवाल करने से सच सामने आता है एवं मनुष्य में जागरूकता बढ़ती है उन्होंने विज्ञान की प्रगति के साथ गणित विषय पर भी चर्चा की एवं सुकरात और गैलीलियो का उदाहरण छात्रों के समक्ष रखा। छात्रों को बताया कि कला से जुड़कर विज्ञान और गणित को अधिक रुचिकर व आसान बनाया जा सकता है क्योंकि ये सभी विषय कला से ही निकल कर आते हैं यदि आप कला से जुड़े हो तो आपको जीवन में सभी विषय बहुत ही आसान रुचिकर लगने लगेंगे। यह यात्रा उन तमाम शहीदों, समाज सुधार एवं भक्ति आंदोलन और सूफीवाद के पुरोधओं का सादर स्मरण है जिन्होंने भाषा, जाति,लिंग और धार्मिक पहचान मानव मुक्ति एवं लोगों से प्रेम को अपना एक मात्रा आदर्श बताया है प्रेम व है जो उम्मीद जगाता है, कबीर बनकर पाखंड पर प्रहार करता है, भाषा, धर्म, जाति नहीं देखता इन पहचानो से मुक्त होकर धर्मनिरपेक्षता का आदर्श बन जाता है l आज के युवा वर्ग को धारा और चेतना क्या है इस विषय पर चर्चा करना चाहिए, देश के लिए जीना चाहिए देश के विकास के साथ ही प्रत्येक मनुष्य का विकास संभव है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में समझाया कि खिलाड़ी एवं अभिनेता को प्रोत्साहित करना व उनको सम्मान देना सही है लेकिन उन्हें नायक या महानायक की उपाधि देना किसी भी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। उन्होंने छात्रों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि – सदी के असल, महानायक तो दशरथ मांझी, ज्योतिबा फूले, डॉ. आंबेडकर, फातिमा शेख, पंडित रमाबाई, भगत सिंह,चंद्रशेखर आजाद, देश के किसान, मजदूर, लेखक, कलाकार,मानवाधिकार कार्यकर्ता आदि वे महान विभूतियां हैं जो देश के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदा डटे रहें हैं।उनका मानना है कि कला जगत के नाम प्रेमपत्र की भाँति है वहीं सत्ता के नाम अभियोग पत्र भी। अतः सर्वोत्तम ज्ञान की प्राप्ति के लिए जीवन के किताब को पढ़ना जरूरी है। अपने अनमोल वचनों के पश्चात इप्टा जन गीत “मेरे गली में खुशी खोजें अगर…..” के साथ उन्होंने अपने शब्दों को विराम दिया।
राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा ने आज ज्योतिबा फूले को उनके जन्मदिन के अवसर पर याद करते हुए समाज को उनके योगदान स्मरण करवाया। वे कहते हैं कि विभिन्न भाषाओं का ज्ञान होना आवश्यक है ये मानव जाति को भावनात्मक रूप से जोड़ने में एवं आत्मीय गुणों के विकास में सहायक सिद्ध होती है।इस पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्राचार्या .आर.मधुलिका, डॉयरेक्टर एस.के.जनास्वामी एवं चेयरमैन डॉ.अजय श्रीवास्तव उपस्थित रहे।डॉ. श्रीवास्तव ने शैलेन्द्र कुमार व उनकी पूरी टीम का विद्यालय आकर अपना अमूल्य समय व अनुभव छात्रों तथा शिक्षकों के साथ बाँटने के लिए सहृदय आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के शिक्षक निहाल सोनी के द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended
बिलासपुर-राजस्व न्यायालय में लोगों को जबरिया प्रताड़ित करने और राजस्व…
Cresta Posts Box by CP