जंगल में गश्त नहीं होने से हो रहे शिकार, शिकार के बाद चीतल पकाते दो पकड़ाए, वन विभाग की कार्रवाई।

बिलासपुर।

कमजोर गश्त से वन्य जीव खतरे में है मंजूरपहरी में पहले भी चीतल के शिकार की घटना हुई है सीपत सोंठी, करहिरकछार बेलगहना, कोटा में 9महीने में 7चीतल के शिकार के मामले आए है, उड़नदस्ता टीम सक्रिय रहे तो  शिकार और लकड़ी अवैध कटाई पर रोक लग सकती है, जंगल में गश्त रहे तो शिकार रुक सकता है लेकिन इस पर गंभीरता नहीं दिख रही है मंत्री भी कई बार कह चुके वन्य जीव संरक्षण में लापरवाही न हो लेकिन मंत्री के कहने का असर नहीं हो रहा है

वन्यप्राणी संरक्षण को लेकर चल रही कार्रवाई के बीच बिलासपुर वन विभाग की टीम ने वन्यप्राणी के अवैध शिकार के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन परिक्षेत्र बिलासपुर और उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने मंजूरपहरी गांव के दहाइतपारा स्थित एक घर में दबिश देकर चीतल का मांस बरामद किया। मामले में दो आरोपि पकड़ा है 

वन विभाग के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि मंजूरपहरी गांव में वन्यप्राणी के अवैध शिकार से संबंधित गतिविधि हुई है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने बिना देरी किए कार्रवाई की। वन परिक्षेत्र बिलासपुर और उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने आरोपी चैनसिंह (40) और राजकुमार (40), निवासी दहाइतपारा, ग्राम मंजूरपहरी, थाना सीपत के घर दबिश दी

वन विभाग की टीम को तलाशी के दौरान घर से चीतल का मांस बरामद होने की जानकारी दी गई है। विभाग के मुताबिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने चीतल का अवैध शिकार करने और उसके मांस को पकाकर खाने की तैयारी किए जाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, मामले में शिकार से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच वन विभाग द्वारा की जा रही है।

बरामद मांस को वन विभाग ने जब्ती में लेकर आवश्यक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि शिकार की घटना कब और किस स्थान पर हुई तथा इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।

वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 17769/11, दिनांक 6 अक्टूबर 2026 दर्ज किया है। प्रकरण में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद दोनों को न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।

वन अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके मांस के उपयोग के मामले बढ़ते जा रहे है।

 

 

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