बिलासपुर ,- देश भर से रायपुर में जुटें सैकड़ों एचआईवी संक्रमित गोपनीय बैठक में दवा छोड़ने जैसा लिया कड़ा फैसला अपनी पीड़ा को बताने के लिए आज रायपुर में एक गोपनीय मीटिंग करने के बाद रायपुर प्रेस क्लब पहुंच कर पत्रकारों से अपनी पीड़ा बताई और कहा कि छत्तीसगढ़ में एचआईवी और एड्स से पीड़ित लोगों के अधिकार और उनकी गोपनीयता आज एक गंभीर संकट के दौर से गुज़र रही है। राज्य के एचआईवी/एड्स संक्रमित व्यक्तियों के संगठन CGNP+ ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं।संक्रमित समुदाय का आरोप है कि पहले सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हें कम्युनिटी नेटवर्क के ज़रिए मिलता था, जिससे उनकी पहचान और गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहती थी। लेकिन जब से ‘छत्तीसगढ़ एड्स कंट्रोल सोसाइटी’ द्वारा संचालित ‘विहान CSC प्रोजेक्ट’ का काम ऐसे गैर-ज़िम्मेदार लोगों या संस्थाओं को सौंपा गया है, जिन्हें एचआईवी की संवेदनशीलता का अंदाज़ा तक नहीं है, तब से स्थिति चिंताजनक हो गई है।पीड़ितों का कहना है कि गलत तरीके से सर्वे करके निर्दोष लोगों, महिलाओं और पुरुषों को चिन्हित कर उन्हें समाज में अपमानित किया जा रहा है*
वी ओ – एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति का समूह सीजीएनपी प्लस ने छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर उनके समुदाय के अधिकतर लोगों के इतना परेशान किया जा रहा है।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने साफ़ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ‘विहान CSC प्रोजेक्ट’ का कार्य दोबारा उनके अनुभवी नेटवर्क को नहीं सौंपा, तो वे सरकार द्वारा दी जाने वाली जीवन-रक्षक ART दवाइयों का सेवन पूरी तरह से बंद कर देंगे। इतना ही नहीं, वे अपनी पहचान सार्वजनिक करते हुए सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। अब सवाल यह उठता है कि संवेदनशीलता के दावों के बीच, पीड़ितों की गोपनीयता और उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ का ज़िम्मेदार आख़िर कौन है? क्या प्रशासन समय रहते इनकी गुहार सुनेगा?*