बिलासपुर,शिक्षिका पूनम शुक्ला भारतीय संस्कार हर बच्चे संस्कारी बने अपनी संस्कृति अपने भारतीय परंपरा और परिवारीक संबधों और कर्त्तर्यो का पाठ पढ़ती है पूनम शुक्ला, पढ़ाने का शौक हो तो सरकारी नौकरी मिले या न मिले अगर अगर समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहा ले व्यक्ति तो राह निकल जाती है , पूनम की न सरकारी नौकरी है न कोई सरकारी समझौता बस उनकी इच्छा है बच्चे संस्कारी बने भारतीय संस्कृति और और ज्ञान को को सीखे और अपने जीवनशैली में लाये इसी भावना से पूनम शुक्ला निःशुल्क बच्चों को पढ़ाती है । बच्चे सीखेंगे तो राष्ट्र सीखेगा विकृति नहीं आएगी इसके दूरगामी अच्छे परिणाम आएंगे। आज पूनम कई सरकारी स्कूल में निःशुल्क बच्चों को यही सिखा रही है। नाश मुक्ति अभियान भी उनके एजेंडे में है उनकी कुछ टिप्स है जो छोटे बच्चों के लिए काम की है।
*”चरित्र ही सबसे बड़ी डिग्री है”*
*चरित्र निर्माण एवं नशा मुक्ति जागरूकता सत्र*
माध्यमिक विद्यालय फरहदा, बिलासपुर
*सत्र की मुख्य बातें:*
1. *50-60 छात्र-छात्राओं* को नैतिक मूल्य और चरित्र निर्माण की शिक्षा
2. *नशा मुक्ति* – शरीर, मन और भविष्य पर दुष्प्रभाव की जानकारी
3. *कन्या सुरक्षा* – मासिक धर्म, स्वच्छता और व्यभिचार से बचाव पर वैज्ञानिक + आध्यात्मिक मार्गदर्शन
4. *मंत्र और ध्यान* के वैज्ञानिक लाभ – एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा
5. बच्चों ने लिया *”स्वस्थ शरीर, शुद्ध मन, ऊंचे विचार”* का संकल्प
*उद्देश्य:* “पढ़ाई के साथ संस्कार, ताकि बने सच्चे भारत के नागरिक