सर्पदंश बवंडर,एक दूसरे को काट रहे,तहसीलदार एसडीएम ने आदेश पारित किया लेकिन पुलिस बाबुओं को परेशान कर रही, पुलिस जांच के खिलाफ राजस्व बाबू लामबंद, सीएम के नाम ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी।
सर्पदंश बवंडर,एक दूसरे को काट रहे,तहसीलदार एसडीएम ने आदेश पारित किया लेकिन पुलिस बाबुओं को परेशान कर रही, पुलिस जांच के खिलाफ राजस्व बाबू लामबंद, सीएम के नाम ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी।
बिलासपुर जिले के लिपिक साथियों के उपर हो रहे एकतरफा कार्यवाही पर रोक लगाने बाबत्।
थाना सरकंडा के अपराध क्र 936/2026 अप 937/2026 अप क्र0 938/2026 धारा 420 468, 471, 34, भा०द०वि० एवं अप० क्र 940/2026 धारा 318 (क) 336, 338, 340 (2),3 (5) बीएनएस के प्रकरण में हमारे तीन लिपिक साथियों को बिना किसी पूर्व नोटिस के गिरफ्तार कर, जेल दाखिल कर दिया गया है। जिसके पश्चात हम लिपिक साथियों द्वारा कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन के माध्यम से बिना जांच किये लिपिक साथियों के गिरफ्तारी पर रोक लगाने हेतु निवेदन किया गया है। जिसके पश्चात हमारे 08 लिपिक साथियों को थाना प्रभारी सरकण्डा के नोटिस दिनांक 18.07.2026 के माध्यम से सभी 08 लिपिक साथियों को थाने में उपस्थित होने 23.07.2026 को कथन हेतु आहूत किया गया था। दिनांक 23.07.2026 को हमारे 08 लिपिक साथियों द्वारा थाना सरकंडा में उपस्थित होकर पुलिस की कार्यवाही में, पूरी तरह से सहयोग प्रदान किया गया है।
पंजीबद्ध अपराधों की विवेचना के दौरान न्यायालय के समक्ष मिथ्या तथ्यों एवं कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत कर न्यायालय से छल (Fraud upon the Court) किए जाने के संबंध में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 227 से 231 सहित अन्य उपयुक्त धाराएँ समाविष्ट कर कार्यवाही किए जाने का अनुरोध है।
तहसीलदार बिलासपुर के ज्ञापन क्र 40 / ना० ना० / तहसीलदार / 2026 दिनांक 01.06.2026 द्वारा आपके अधीनस्थ थाना कोनी, थाना तोरवा, थाना सरकंडा, थाना सिविल लाईन में कुल प्राथमिकी दर्ज कर, जांच की जा रही है। थानों में दर्ज सर्पदंश से हुई मृत्यु के आर्थिक सहायता के प्रकरणों के संबंध में की जा रही विवेचना के दौरान निम्न बिन्दुओं पर भी विचारण आवश्यक है-
छत्तीसगढ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 6 क्रमांक 4, अधिसूचना दिनांक 01.12.2022 द्वारा जारी एवं 03.10.2023 द्वारा यथा संशोधित के द्वारा निर्धारित प्राकृतिक आपदा के प्रकरणों में पीड़ित परिवार को 4,00,000/- रूपये आर्थिक सहायता राशि अनुदान उपलब्ध करायी जाती है जिसमें सर्व प्रथम पीड़ित व्यक्ति अथवा उनके अधिकृत अभिकर्ता के माध्यम से सक्षम न्यायालय तहसीलदार / अतिरिक्त तहसीलदार के समक्ष आवेदन शपथ पत्र सहित पेश किया जाता है। आवेदन की प्राप्ति पर संबंधित रीडर / वाचक को तहसीलदार/ नायब तहसीलदार के द्वारा रीडर को दर्ज करने विषयक टीप किये जाने पर प्रकरण दर्ज कर माननीय पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। , वाचक केवल प्रस्तुतकर्ता के तौर पर न्यायालय के आदेश पर न्यायालयीन दस्तावेजों का संधारण एवं नस्तीबद्ध होने उपरांत अभिलेखागार में जमा करने का कार्य करता है। इस प्रक्रिया में वाचक / रीडर की भूमिका किसी भी दृष्टिकोण से आपराधिक माना जाना स्थापित विधि सिद्धांतों के विपरीत है। प्रकरणों के प्रत्येक चरण में निर्णय लेने का सम्पूर्ण अधिकारी पीठासीन अधिकारीयों का है।
, उक्त प्रकरणों में समाचारों के माध्यम से विदित हुआ है कि आवेदकों द्वारा जाली हस्ताक्षरों, फर्जी सील, और झूठे शपथपत्रों के आधार पर, अनुकूल आदेश प्राप्त किया गया । वाचक का कार्य दस्तावेजों का सत्यापन करना या जांच करना नही है, वाचक केवल प्राप्त दस्तावेजों को पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करता है। उक्त प्रकरणों आदेश तीन पीठासीन अधिकारीयों के न्यायालय में सुनवाई उपरांत ही पारित किया गया है। ऐसी स्थिति में थाना प्रभारी सरकण्डा द्वारा केवल वाचक को जारी नोटिस प्रथम दृष्टया ही खारिज किये जाने योग्य है।
, विधिक संरक्षणों एवं प्रक्रियात्मक तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए हमारे विरूद्ध की जा रही अनुचित एवं अपमानजनक कार्यवाही से प्रदेश के समस्त रीडर के रूप में कार्य कर रहे वाचकों में भय व्याप्त है कि किसी भी प्रकरण में बिना जांच के केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले / संधारित करने वाले वाचकों पर ही सीधे आपराधिक श्रेणी की कार्यवाही की जा रही है। हमारे विरूद्ध की जा रही कार्यवाही को संज्ञान में लेते हुए तत्काल रोक लगाने का कष्ट करें, ताकि हम बिना किसी भय के अपने कार्यो का निर्वहन कर सकें। उचित आश्वासन नहीं मिलने पर27तारीख से हम चरण बद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे।