कम वर्षा की आशंका के बीच कृषि विभाग की किसानों को सलाह।

*वैज्ञानिक खेती और नमी संरक्षण पर दें विशेष ध्यान*

बिलासपुर, 25 जून 2026/ अल-नीनो के संभावित प्रभाव और खरीफ मौसम में वर्षा के विलंबित आगमन की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक खेती एवं उर्वरक प्रबंधन अपनाने की अपील की है। विभाग ने कम पानी की स्थिति में भी फसलों की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तकनीकी उपाय सुझाए हैं।

      कृषि विभाग के उप संचालक के अनुसार किसानों को सभी फसलों की बुवाई कतार पद्धति से करनी चाहिए। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की समुचित वृद्धि में सहायता मिलती है। साथ ही फसलों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित होती हैं, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।विभाग ने सलाह दी है कि बुवाई के 3 से 5 दिनों के भीतर अनुशंसित मात्रा में अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी का उपयोग किया जाए तथा बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पुनः खरपतवार नियंत्रण किया जाए। इससे मिट्टी में उपलब्ध नमी का बेहतर संरक्षण संभव होगा।

     बीज उपचार को अनिवार्य बताते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फफूंदनाशी एवं कीटनाशी दवाओं से बीज उपचार करने की सलाह दी है। इसके साथ ही धान में एजोस्पिरिलम तथा दलहनी फसलों में राइजोबियम जैसे जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।उप संचालक ने बताया कि यदि बुवाई के बाद 15 जुलाई तक पर्याप्त अंकुरण नहीं होता है तो पुनर्बुवाई की जाए तथा सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग किया जाए।कम वर्षा अथवा नमी की कमी की स्थिति में नत्रजनयुक्त उर्वरकों के सीमित उपयोग तथा 2 प्रतिशत यूरिया घोल के पर्णीय छिड़काव को अधिक प्रभावी बताया गया है।

       दलहनी एवं तिलहनी फसलों में डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव से पौधों की वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता में सुधार होता है। कृषि विभाग ने किसानों को आवश्यकता अनुसार मल्चिंग तकनीक अपनाने की भी सलाह दी है, जिससे मिट्टी में नमी संरक्षित रहती है और सूखे का प्रभाव कम होता है। विभाग ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी समस्या या तकनीकी मार्गदर्शन के लिए निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।कृषि विभाग का कहना है कि समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन और नमी संरक्षण के उपाय अपनाकर किसान कम वर्षा की परिस्थितियों में भी फसलों को सुरक्षित रखते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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