आईआईटी खरगपुर में हुए स्पिक मैके 11वें राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल हुए प्रतिभागियों का अनुभव साझा।

बिलासपुर ,जून 2026, खड़गपुर:* सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ (स्पिक मैके) द्वारा आयोजित 11वां राष्ट्रीय अधिवेशन 25 मई से 31 मई 2026 तक आईआईटी खरगपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन के पश्चात प्रतिभागी छात्रों, शिक्षकों एवं प्रोफेसरों ने अपने अनुभव साझा किए। 

अनुभव साझा सत्र की शुरुआत आधारशीला विद्या मंदिर न्यू सैनिक स्कूल की छात्रा अद्विका खंडेलवाल ने की। उन्होंने अधिवेशन की प्रातःकालीन दिनचर्या के बारे में बताया और गुरु कोटाक्कल नंदकुमारन से कथकली की 24 मुद्राएं सीखकर उनका प्रदर्शन किया। रुचि देवांगन ने विदुषी शर्मिला विश्वास से ओडिसी, सेजल सूर्यवंशी और आराध्या तिवारी ने विदुषी वैजयंती काशी से कुचिपुड़ी नृत्य सीखने का अनुभव बताया। प्रयाग श्रीवास ने गुरु श्री आशीष मालाकार से बंगाल की सुप्रसिद्ध शोलापीठ हस्तकला का ज्ञान प्राप्त किया। आराध्य जायसवाल ने पद्मश्री सम्मानित विद्वान आर. एन. त्यागराजन से कर्नाटक संगीत के अंतर्गत भैरवी राग सीखने का अनुभव साझा किया। ब्रिलिएंट स्कूल बहतर‌ई की छात्रा ने भी अपने अनुभव रखे।

आधारशीला विद्या मंदिर न्यू सैनिक स्कूल की शिक्षिका अपूर्वा तिवारी ने सात्विक जीवन शैली, योग साधना, सात्विक भोजन तथा बाउल संगीत एवं ध्रुपद गायन जैसी विधाओं से प्राप्त नई जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बच्चों ने अन्य राज्यों के छात्रों से मित्रता की, सहयोग की भावना विकसित हुई और विभिन्न कला परंपराओं को सीखने का अवसर मिला। शिक्षिका श्रीमती रंजना दत्त ने व्यवस्थित दिनचर्या, हठ योग और गुरु  बापूकान प‌एंग से हथकरघा बुनाई सीखने के अनुभव बताए।

सम्मेलन के दौरान आधारशीला विद्या मंदिर न्यू सैनिक स्कूल के चेयरमैन  अजय श्रीवास्तव ने स्पिक मैके की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ने, वालंटियर बनने और इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर नृत्य धारा अकादमी की शिक्षिका आंचल पांडे एवं संकल्प लर्निंग क्लासेस के शिक्षक विकास सर उपस्थित रहे।

सम्मेलन का समापन भातखंडे संगीत महाविद्यालय बिलासपुर की प्रोफेसर श्रीमती ममता चक्रवर्ती ने स्पिक मैके के साथ अपने 15 वर्ष के अनुभव साझा कर किया। उन्होंने बच्चों को स्पिक मैके के उद्देश्यों से अवगत कराया और शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य व भारतीय कलाओं के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

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