बिलासपुर ,प्रार्थिया अनुसंधान एवं विस्तार वनमण्डल के कोरबा इकाई में पदस्थ है। प्रार्थिया की ड्यूटी वनरक्षक भर्ती शारीरिक नापजोख एवं दक्षता परीक्षा में लगाई गई थी जिसमें प्रथम बार प्रार्थिया की मुलाकात वनरक्षक महिला एवं वनपाल से हुई थी। इस ड्यूटी के दौरान वनपाल द्वारा प्रार्थिया के समक्ष प्रेम प्रसंग का प्रस्ताव रखा गया था जिसे प्रार्थिया द्वारा सिरे से नाकार दिया गया था। उसी रात को नशे के हालत में फोन करके बार-बार प्रेम प्रसंग का प्रस्ताव रखकर परेशान करने लगा था, प्रार्थिया परेशान होकर संबंधित का फोन उठाना बंद कर दी तद्धपरांत वनरक्षक द्वारा फोन करके उक्त व्यक्ति को कांफ्रेस कॉल (Merge Call) करके प्रार्थिया की बात शर्मा से कराई तथा के प्रेम प्रसंग को स्वीकार करने हेतुवन महिला वन रक्षक सिंह द्वारा दबाव बनाया गया। इस कांफ्रेस कॉल के दौरान द्वारा प्रार्थिया को ‘यदि तम्हारा बॉयफ्रेन्ड हुआ तो तुमको और तुम्हारे बॉयफ्रेन्ड को जान से मार दूंगा’ ऐसा कहकर धमकी दिया गया। इस घटना कम को दोनो के द्वारा बार-बार दोहराया गया था, चूंकि तत्कालीन समय में शर्मा बिलासपुर संभाग में अपने ओहदा का फायदा उठाकर सभी अधिकारी को अपने पक्ष में रखता था इसलिए तात्कालीन समय में शिकायत को करने में भयभीत हो चुकि थी और डरी सहमी विभागीय शासकीय कर्तव्यो का निर्वहन करते आ रही थी तथा प्रार्थिया घटना दिनांक से आज तक मानसिक रुप से प्रताड़ित है। प्रार्थिया को जान माल का खतरा बना हुआ है। जानकारी के अभाव में शिकायत नही कर पाई थी. तथा न्याय की उम्मीद छोड़ चुकी थी प्रार्थिया वर्तमान में परिवार जनों से समस्त घटना कमों के संबंध में चर्चा कर हिम्मत जुटाते हुए यह शिकायत की है लेकिन वन अधिकारी और महिला उत्पीड़न समिति पीड़ित महिला की शिकायत पर कार्यवाई करने की बजाय पीड़ित महिला के आवेदन को दबा कर बैठ गए है , जीरो टॉलरेंस वाली विष्णु देव सरकार की ये लोग छवि खराब कर रहे है आदिवासी सीएम आदिवासी वन मंत्री फिर भी आदीवासी महिला कर्मचारी मानसिक पीड़ा झेल रही है, री कर्मचारी उसी अश्लील गाली दे रहे है उसका रिकॉर्डेड बयान महिला ने विभाग को उत्पीड़न समिति को दिया है लेकिन फिर भी कार्यवाई नहीं हो रही है। आदिवासी महिला कर्मचारी के साथ अश्लीलता की हद पार करने वाले कर्मचारी सुरक्षित है अधिकारी इस पर कार्यवाई नहीं कर रहे है , मामले को दबाने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। पीड़ित महिला कर्मचारी को डीएफओ और लैंगिक उत्पीड़न समिति को आवेदन दिए एक माह से ऊपर हो गया है लेकिन पीड़ित आदिवासी महिला को न्याय नहीं मिला है। जबकि वो लगातार अधिकारियों से मिल रही है। लेकिन सुनवाई नहीं है।
