हाईकोर्ट की रोक के बाद सुनवाई और आदेश जारी करना गंभीर कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण।

विलासपुर,हाई कोर्ट की रोक के बाद भी मामले में सुनवाई करने और आदेश जारी के करने पर रायगढ़ फैमिली कोर्ट के प्रोसिडिंग ऑफिसर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जस्टिस विभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने ट्रांसफर पिटीशन पर सुनवाई करते हुए रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए हैं कि वे संबंधित जज से स्पष्टीकरण मांगें कि हाई कोर्ट द्वारा कार्यवाही पर रोक लगाने के बावजूद उन्होंने मामले की सुनवाई क्यों जारी रखी? वर्तमान में संबंधित जज का तबादला हो चुका है और नए जज ने कार्यभार संभाल लिया है, इस वजह से हाई कोर्ट ने ट्रांसफर याचिका को निराकृत कर दिया है लेकिन जज के आचरण पर प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं। रायगढ़ निवासी महिला ने बिलासपुर निवासी पति के खिलाफ रायगढ़ फैमिली कोर्ट में लंबित तलाक के मामले को किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए हाई कोर्ट में ट्रांसफर पिटीशन लगाई थी, इसमें आरोप लगाया कि कोर्ट के कर्मचारी दूसरे पक्ष के साथ मिले हुए हैं और कोर्ट की डायरी में हेरफेर कर बहुत कम अंतराल की तारीखें दी जा रही हैं। इसके अलावा उनकी अनुपस्थिति में भी कार्यवाही दर्ज की जा रही थी। जस्टिस विभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने 10 मार्च 2026 को मामले की गंभीरता को देखते हुए रायगढ़ फैमिली कोर्ट की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी। रोक के बाद जारी किया आदेश : हाई कोर्ट के संज्ञान में यह आया कि 10 मार्च 2026 की सुबह 11 बजे ही याचिकाकर्ता के पिता और वकील ने जज को हाई कोर्ट के स्टे की सूचना दे दी थी, इसके बावजूद जज ने दोपहर 12 बजे दो अंतरिम आवेदनों पर फैसला सुना दिया। 12 मार्च 2026 को स्टे की वेब कॉपी और शपथ पत्र प्रस्तुत करने के बाद भी जज ने कार्यवाही जारी रखी।

गुजारा – भत्ता नहीं लेने पर की टिप्पणी :इसकेअलावा फैमिली कोर्ट के जज ने याचिकाकर्ता महिला द्वारा गुजारा-भत्ता की राशि नहीं लेने पर टिप्पणी की, कहा लगता है कि उसे राशि की आवश्यकता नहीं है। गुजारा-भत्ता के अंतरिम आदेश को निरस्त करने पर विचार करने की बात कही।

हाई कोर्ट ने रद्द किया आदेश : हाई कोर्ट

 हाई कोर्ट के स्टे दिए जाने के बाद – निचली अदालत फंक्टस ऑफिशियो यानी – कार्यमुक्त हो जाती है। ऐसे में फैमिली कोर्ट द्वारा 10 और 12 मार्च को दिए गए सभी आदेशों को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया गया है।

है। रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे संबंधित जज से 15 दिनों के भीतर लिखित सकस। यह स्पष्टीकरण हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष प्रशासनिक पक्ष पर रखा जाएगा।

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