बिलासपुर/कोटा में दो महारथियों के बीच अटल पहली बार कोटा से मैदान मे है , जोगी और जूदेव का परिचय बताने की जरूरत नहीं राजनीत के दो दिग्गज के परिवार मैदान में , एक चार सौ किलोमीटर से आया है, भाजपा ने स्थानीय कार्यकर्ता करते हुए बाहरी प्रत्याशी दिया है कभी कोटा की जनता के लिए प्रबल प्रताप लड़े नही लेकिन चुनाव लड़कर विधायक का ताज पहनने के इच्छुक है, राजनिक गणिताबाजी के चलते बड़े मठाधीश नेताओं ने चार सौ किलोमीटर दूर से प्रत्याशी लाया जबकि खुद किसी भाजपा के मठाधीश नेता ने निगेटिव सर्वे के बाद भी सीट नहीं छोड़ी, बीजेपी कार्यकर्ता की पार्टी नही रही, कांग्रेस से ज्यादा रोग बीजेपी को लग गया है, कोटा में स्थानीय प्रत्याशी की उपेक्षा इसका उदाहरण है, बीजेपी लगातर कार्यकर्ता की उपेक्षा कर रही है इसलिए ग्राफ गिर गया है, बीजेपी अब कार्यकर्ताओ और नही मैनेजमेंट कंपनी को ज्यादा भरोसेमंद मानती है, प्रबल प्रताप के साठ बाहरी समर्थक भी आए है उन्हीं की चल रहीं है ,और चुनाव के बाद ये गायब हो जाएंगे ,ये भी प्रत्याशी की तरह बाहर से है। रेणु जोगी बुजुर्ग हो गई है लेकिन दम पूरा है भरोसा अपने पति के नाम और काम का, इसी उम्मीद पर मैदान में है पुरने समर्थकों के साथ रेणु जोगी डटी हुई है, अजीत जोगी के निधन के बाद मैदान में है रेणु जोगी को उम्मीद है लोग निराश नहीं करेगे, पहली बार यूवा अटल श्रीवास्तव मैदान में है जिले में अटल का प्रभाव है सीएम खुद टिकट दी है यानी तस्वीर साफ है की अटल कोटा में वो सब कर सकते है जो कोटा की जनता की मांग है , पुराने राजनितिक दिग्गज के बीच अटल कोटा की फिजा बदल देने का दावा कर रहे है, राजनीतिक गणितबाजी में भी चाल अटल की भारी है, जंग में संधी समझौता,और दुश्मन को भी दोस्त बना लिया जाता है, अटल के हाथ में कोटा मजबूत इच्छासख्ती और और संसाधनों के बेहतर इस्तमाल से ही आ सकता है। कोटा के ताज में शहद तो है लेकिन मधुमक्खी के के कांटे कांटे भी है जो मधुमक्खी के कांटे से बचना जानेगा वही शहद पी पाएगा।फिर चाहे वो जोगी हो या जु द व याफिर अटल।
