बिलासपुर- स्व ० डॉ ० भंवर सिंह पोर्ते जो मरवाही विधानसभा के अस्तित्व उपरांत के 04 बार से विधायक निर्वाचित हुए सन् 1972 , 1977 , 1980 1990 में हुए एवं कैबिनेट एवं राज्य मंत्री अभिभाजित मध्य प्रदेश मे रहे , साथ ही कॉंग्रेस विभाजन के समय 1978 में कॉग्रेस के 10 विधायकों को दल मे बनाये रखने के लिए महत्वपूर्ण योगदान विभाजन के बाद कॉंग्रेस की पार्टी में बने रहे , एवं पार्टी कार्य करते हुए कई बार जेल यात्रा की किये । वर्ष 1978-79 मे म ० प्र ० युवक कॉंग्रेस के अध्यक्ष भी रहे । साथ ही गॉधी परिवार से हमेशा जुड़े रहे इस कारण से उन्हें उस परिवार से स्नेह भी मिलता रहा । जिन्होंने शिक्षा हेतु उनके विशेष प्रयास से डॉ ० भंवर सिंह पोर्ते महाविद्यालय पेण्ड्रा की नींव रखी जिसमें लगभग आज 2 से 3 पीढ़ी उच्च शिक्षा अध्यन कर चुके है । इसके साथ ही स्कूल शिक्षा एवं खेल प्रतिभा को बढ़ाने हेतु उनके द्वारा सन् 1980 से गुरुकुल विद्यालय की स्थापना कराये । सिचाई कार्य हेतु अनेक डेम की स्थापना भी किये साथ ही आदिवासी वर्ग के लिए परियोजना कार्यालय एवं अनुसूचित क्षेत्रो का चिन्हांकित कर जन जाति वर्ग के लिए नौकरी एवं चुनाव में सीटे आरक्षित कराये एवं उनके द्वारा आदिवासी विकास परिषद की समाजिक संस्था की गठन कर अपने साथ जनजाति वर्ग के लोगो को जोड़े रखे । साथ ही मेरे पूज्य माता श्रीमती हेमवंत पोर्ते अभिभाजित म.प्र . एवं छ.ग. मे प्रथम राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रही उनके द्वारा भी मरवाही विधानसभा क्षेत्र में अनेक जनहित व समाज हित के कार्य किये गये । जिसके कारण हमारे परिवार के प्रति लोगो की स्नेह व सहानुभूमि रहती है साथ ही राजनैतिक क्षेत्र मे देखना भी चाहते है । 90 दशक के बाद स्व . अजीत जोगी जी से हमारे परिवारिक मतभेद व मेरे ताउ जी स्व . स्वरूप सिंह पोर्ते ( आई.ए.एस. ) के द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र अजीत जोगी का शिकायत किया गया था , जिन कारणो से हम लोगो को मतभेद व व्यक्तिगत बैमनस्ता के कारण राजनीति में नहीं आने दिये व अन्य दल में कुछ वर्ष के लिए रहे । साथ ही मेरे पति शंकर सिंह कंवर जो लंबे वर्षों तक पंचायत में सरपंच ग्राम पंचायत गिरवर , जिला पंचायत सदस्य , उपाध्यक्ष , सभापति जिला पंचायत बिलासपुर में रहे जिनका लाभ वर्तमान में मरवाही चुनाव में मिलेगा ।

