बच्चे राष्ट्र की संपत्ति है, जो देश के भविष्य को आकार देंगे, उनकी सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता है : न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश

आठवें राज्य स्तरीय कंसलटेशन के शुभारंभ समारोह के अवसर पर कहा

बिलासपुर-बच्चे राष्ट्र की संपत्ति है, जो देश के भविष्य को आकार देंगे, उनकी सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता है : न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश जनरल अरविंद कुमार वर्मा, विधि विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश श्रीवास्तव, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार विजिलेंस सुधीर कुमार, रजिस्ट्रार (न्यायिक) के. विनोद कुजूर, कम्प्यूटर शाखा के रजिस्टार शक्ति सिंह राजपूत, अन्य रजिस्ट्री के न्यायिक अधिकारी तथा राज्य न्यायिक एकेडमी के अतिरिक्त निदेशक हरीश अवस्थी, श्रीमती गरिमा शर्मा एवं एकेडमी के अन्य न्यायिक अधिकारीगण, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव आनंद प्रकाश वारियाल, किशोर न्याय सेल के सचिव देवेन्द्र कुमार, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के पूर्व सचिव प्रशांत पराशर उपस्थित रहे। उक्त कार्यशाला के शुभारम्भ सत्र के पश्चात् दो तकनीकी सत्र में आयोजित किये गये, प्रथम सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल, न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुश्री रेणु गोनेला एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के विशेष सचिव पोषण चन्द्राकर की अध्यक्षता में तथा द्वितीय सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल, मान्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय, शिक्षा विभाग की प्रबंध निदेशक श्रीमती इफ्फत आरा, गृह विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू एस. तथा छत्तीसगढ यूनिसेफ प्रमुख जॉब जाकरिया की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें किशोर न्याय एवं बाल अपराधों से संबंधित विभिन्न विषय एवं समस्याओं एवं उसके निदान पर उपस्थित सर्वसंबंधित विभागों के द्वारा प्रस्तुतिकरण दिया गया। उक्त कार्यशाला का आभार प्रदर्शन राज्य न्यायिक एकेडेमी की अतिरिक्त निदेशक हरीश अवस्थी के द्वारा एवं मंच संचालन अतिरिक्त निदेशक श्रीमती गरिमा शर्मा द्वारा किया गया। उपरोक्त कार्यशाला में विशेष रूप से बाल अधिकार संरक्षण आयोग से सोनल कुमार गुप्ता, कौशल विकास विभाग से श्रीमती ज्योति गुग्गल, पुलिस विभाग से डीआईजी श्रीमती मिलेना कुर्रे एवं पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह उपस्थित थे। उपरोक्त कार्यशाला में प्रतिभागी के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश, सामाजिक सदस्य, बाल कल्याण समिति के अध्यक्षगण, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल सुरक्षा अधिकारीगण, विधि अधिकारी, जिलों के काउंसलर, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग, गृह विभाग, पुलिस विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, स्कूल विभाग, कौशल विकास विभाग, यूनिसेफ के प्रतिनिधिगण, बाल सम्प्रेक्षण गृह के विजिटर, विशेष किशोर पुलिस ईकाई के अधिकारीगण, विधि के छात्रागण बढ़ी संख्या में उपस्थित रहे। अवगत हो कि उच्चतम न्यायालय के बाल कल्याण समिति के द्वारा माह सितम्बर, 2023 में नई दिल्ली में ‘‘विधि के साथ संघर्षरत बच्चों के अपराध निवारण, पुनर्स्थापनात्मक न्याय, परिवर्तन एवं उनके हिरासत के विकल्प’’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। उक्त परिपेक्ष्य में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के किशोर न्याय सेल के द्वारा उपरोक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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