कोंडागांव के पूर्व डीईओ मिश्रा के खिलाफ हाईकोर्ट का वारंट।

अवमानना प्रकरण में कोंडागांव जिले के पूर्व DEO मिश्रा के खिलाफ हाई कोर्ट का वारंट:::: 31 मार्च को कोर्ट में उपस्थित रखने के निर्देश:::

बिलासपुर-जिला कोंडागांव के विकासखंड माकड़ी के अंतर्गत रहने वाले श्रीमती गीता कोरारा्म श्रीमती सुशीला प्रधान कुमारी रीता पांडे पुखराज दीवान गायत्री पूरन पांडे हेमंत कुमार महावीर चिंता हरण पुरुषोत्तम प्रवीण कुमार यादव हितेशवरी् दीपक कुमार पांडे अशोक कुमार नेताम यशवंत फुलेश्वरी नेताम देवेंद्र कुमार रोशन लाल बघेल आंगनमती हितेश कुमार ,कुमारी अश्वनी सावित्री हितेंद्र लीलावती राजेश्वरी सेन कांति मरकाम छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत अवमानना याचिका प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के द्वारा रिट याचिका डब्ल्यू पी एस 5241/ 2020 में पारित आदेश 15 जनवरी 2021 की पालना किए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी कोंडागांव के पद में तत्कालीन समय में कार्यरत श्री राजेश मिश्रा के खिलाफ न्यायालय अवमानना की कार्यवाही किए जाने हेतु अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से अवमानना याचिका पेश किया था जिस पर पूर्व में हाई कोर्ट के द्वारा उक्त जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी की जा चुकी थी किंतु उसके बाद भी उक्त जिला शिक्षा अधिकारी अथवा उसकी ओर से किसी भी प्रतिनिधि के उपस्थित नहीं होने पर हाईकोर्ट के माननीय जज पी एम कोसी ने उसे गंभीरता से लेते हुए 8 फरवरी 2023 को राजेश मिश्रा के खिलाफ ₹25000 का जमानती वारंट का आदेश जारी कर निर्देशित किया है कि उक्त राजेश मिश्रा वारंट की तामिली कर उनको 31 मार्च 2023 को न्यायालय के समक्ष उपस्थित रखने का निर्देश जारी किया है सभी याचिकाकर्ता गण जिला कोंडागांव के विभिन्न शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हाई स्कूल एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भृत्य के पद पर लंबे समय से कार्यरत थे उनकी लंबी सेवा अवधि के बाद भी उन्हें बाद में काम से हटा दिया गया था तब वे हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत याचिका पेश की थी जिस पर हाईकोर्ट के जज पी सेम कोसी ने 15 जनवरी 2021 को आदेश जारी कर संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर छत्तीसगढ़ एवं जिला शिक्षा अधिकारी कोंडागांव को निर्देशित किया था कि वे याचिकाकर्ता गण के द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन का निराकरण कर चार माह के भीतर निराकरण कर विभाग में भृत्य के रिक्त पद जो कि स्वीकृत हैं उनमें याचिका कर्तागण को उनके अनुभव पूर्व में की गई सेवा अवधि को देखते हुए नियुक्ति में प्राथमिकता दे क्योंकि भृत्य के पद की विभाग को नियमित रूप से आवश्यकता होती है इसलिए नियुक्ति पर याचिकाकर्ता गण को प्राथमिकता देते हुए उन्हें भृत्य के पद पर नियुक्ति करने के संबंध में उनके अभ्यावेदन का 4 माह के भीतर निराकरण करने का निर्देश जारी किया था उस समय जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर उक्त राजेश मिश्रा वहां पदस्थ था जिनके द्वारा हाईकोर्ट के आदेश की पालना करने में चूक की गई जिसके खिलाफ अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई है जिस पर सुनवाई करते हुए 8 फरवरी को हाईकोर्ट ने उक्त तत्कालीन रूप में कोन्डागाव जिले में पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी राजेश मिश्रा के खिलाफ वारंट का आदेश जारी कर उन्हें कोर्ट के समक्ष ३१मार्च को उपस्थित रखने का निर्देश जारी किया है।

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