किडनैपिंग के आरोपी को हाईकोर्ट ने दी जमानत।कोर्ट ने पाई पुलिस की जांच में खामी।

बिलासपुर-छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा उड़ता पंजाब ढाबा, सोमानी, राजनांदगाँव के बेटे की पचास लाख की फिरौती के लिए किडनपिंग के प्रकरण के एक मुख्य आरोपी – सुनील तिवारी को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी।

घटना – उड़ता पंजाब ढाबा के मालिक – बलजीत सिंह के बेटे – गुरप्रीत सिंह को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा किडनैप उनके देवड़ा ग्राम स्थित ढाबे से कर लिया था । घटना के उपरांत अज्ञात अभियुक्तों द्वारा गुरप्रीत को छोड़ने के लिए पचास लाख रुपये की माँग की गई थी, जिसकी शिकायत सोमानी थाना में बलजीत सिंह द्वारा की गई ।

सोमनी थाने की पुलिस द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ धारा 384, 363, 365, 364-A, 120-B व 34 भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई तथा जाँच के दौरान अभियुक्त – सुनील तिवारी, निवासी – ग्राम – लाहुरिया पलासी, गढ़, ज़िला – Rewa, मध्य प्रदेश से दिनांक – 16-10-2020 को गिरफ़्तार किया गया ।

जमानत के आधार –

  1. अभियुक्त को केवल इस आधार पार गिरफ़्तार किया गया था कि उसके पिताजी के नाम की 4-wheeler (बोलेरो) को सह-अभियुक्त शरद तिवारी से जप्त किया गया एवं उसका नाम सह-अभियुक्त द्वारा अपने मेमोरेंडम कथन में लिया गया है, परंतु चार्जशीट एवं गवाहों के बयान में ऐसा कहीं से भी दर्शित नहीं है की बोलेरो गाड़ी का इस्तेमाल घटना में किया गया हो एवं गुरप्रीत व उसके पिता बलजीत ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि घटना में मारुति ciaz और टोयोटा फॉर्च्यूनर गाड़ी की इस्तेमाल हुआ था जिसका अभियुक्त सुनील तिवारी से कोई रिलेशन नहीं है ।
  2. पुलिस का यह कहना था की अभियुक्त सुनील तिवारी की शिनाख्तगी गुरप्रीत सिंह द्वारा की गई इसलिए उसे गिरफ़्तार किया गया है परंतु शिनाख्तगी गवाह – नरेंद्र सिंह ने अपने बयान में स्पष्ट किया की उसके समक्ष कोई शिनाख़्तगी परेड की ही नहीं गई जो कि पुलिस की विवेचना पर सवाल खड़े करता है ।
  3. कॉल डेटेल्स में कहीं भी ऐसा दर्शित नहीं हुआ की अभियुक्त सुनील तिवारी का अन्य से-अभियुक्तों से कोई संपर्क या संबंध पूर्व से था ।
  4. Bail is a rule and jail is an exception के सिद्धांत तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संजय चंद्रा विरुद्ध सीबीआई में पारित निर्णय के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अनिश्चित काल के लिए as an undertrial प्रिजनर के रूप में जेल में नहीं रखा जाना चाहिए जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २१ का उल्लंघन है ।
  5. इन आधारों पर आरोपी अभियुक्त की दलील स्वीकार कर न्यायालय ने अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया ।

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