बिलासपुर- अगर शहर में आपको या परिवार को लजीज घर जैसा स्वादिष्ट भोजन करना है तो रसोई से अच्छा शहर में कोई विकल्प नही है ।भारतीय खाने की लाजवाब रेसिपी अगर शहर में ईमानदारी से कंही मिलती है तो उसका नाम रसोई है रसोई किसी पहचान या प्रचार का मोहताज नही है ,रसोई के खाने की खास बात ये है कि उसका स्वाद हमेशा एक सा रहता है ,ग्राहक की जबान का स्वाद पहचानने वाले होटल के संचालक मुकेश चौकसे का जवाब नही, पूरी हमेशा पूरी ईमानदारी से ग्राहक को बेहतर देने की कोशिश करते है ,रसोई हर घर की रसोई जैसी है रसोई को बहुत से लोग जानते नही है खाने की क्वालिटी खुद मुकेश चौकसे चेक करते है सबसे खास की कोई भी खाना एक बार कब तेल में तैयार होता है उसका दुबारा इस्तेमाल बिलासपुर इस्तेमाल नही होता ,साफ सुथरा खाना बनाना रसोई की आदत में शुमार है , रसोई की जितनी सफाई से खाना शहर के किसी होटल में बनता ही नही, कोई भी होटल वाला कभी किसी ग्राहक को अपनी रसोई नही दिखाता लेकिन रसोई के संचालक अपने ग्राहकों को अपनी रसोई दिखाते है , रसोई का खाना यंहा के कर्मचारी और सप्लाई बेहद नापितुलि और सटीक है ,जितना साफ सुथरा और स्वादिष्ट खाना रसोई में मिलता है शायद ही रायपुर में इतना अच्छा स्वाद हो। परिवार के साथ खाना खाने की शहर में इससे अच्छी जगह नही शुद्ध शाकाहारी भोजन की यहां लंबी फेहरिस्त है।वाजिब दाम में बेहतरीन और लजीज खाना रसोई की नही बिलासपुर की पहचान है।मुकेश चौकसे को अपने ग्राहकों को बेहतर खाने के साथ बेहतर स्वाद देने का जुनून है ,जबकि कई बड़े होटल वाले केवल ग्राहक की क्वांटिटी पर ध्यान रखते है जबकि रसोई में केवल और केवल क्वालिटी और स्वाद का ध्यान रखा जाता है पैसा कमाने से ज्यादा रसोई के संचालक इस बात पर ध्यान देते है कि ग्राहकों को कैसे बेहतर से बेहतर स्वादिष्ट भोजन खिलाये । कोई अगर बिलासपुर आये और रसोई का खाना नही खाया तो कुछ नही किया।
