अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी से,बहरेपन का इलाज।

बिलासपुर- एक साल तक की उम्र तक भी आवाज देने पर बच्चा नहीं सुने तो सावधान हो जाएं । यह कानों से जुड़ी बीमारी की वजह हो सकती है । वयस्को में भी सुनने की क्षमता में दिन प्रतिदिन कमी या गिरावट महसूस हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाना चाहिए । ऐसे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है । लोग इस उम्मीद में समय गया देते हैं कि समय के साथ समस्या ठीक हो जायेगी परंतु देर होने से बाद में ऐसे मरीजों का इलाज मुश्किल हो जाता है । ऐसे मरीजों का उपचार कॉक्लियर इम्प्लांट प्रत्यारोपण से किया जाता है । पत्रवार्ता में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के वरि . ई एन टी सर्जन डॉ पी पी मिश्रा एवं डॉ . हेतल मेहता , मुम्बई ने दी । क्या है प्रकिया ? कोक्लियर इंप्लांट एक छोटी सी इलेक्ट्रानिक डिवाइस है जिसके भीतरी और बाहरी दोनों भाग होते है । यह डिवाइस सुनने के लिए उत्तरदायी कोक्लेयर नर्व को आवाल समझने के लिये उत्तेजित करती है । कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी बेहतर सुनने में आपकी मदद कर सकती है । हालांकि यह आपके सुनने की क्षमता का ना तो वापस ला सकती हैं और ना ही सुनाई कम देने की प्रक्रिया को रोक सकती है । इसे क्यों किया जाता है ? आपको कोक्लियर इप्लाट सर्जरी की सलाह दी जा सकती है , यदि आप महसूस कर रहे हैं । कि आपके दोनों कानों में सूनने क्षमता कम हो रही है सुनने के उपकरण ज्यादा मदद नहीं कर पा रहे है आप सुन तो लेते हैं लेकिन स्पष्टता ना के बराबर होती है आपके साथ स्वास्थ्य संबंधी कोई और परेषानी ना हो जिसकी वजह से सर्जरी का खतरा बढ़ जाता हो । इस प्रक्रिया के दौरान क्या होता है ? कोक्लियर इंप्लाट सर्जरी सामान्य रूप बेहोष करके की जाता है । सर्जन कान के पीछे स्थित मस्तूल की हड्डी की खोलने के लिए एक चीरा लगाते हैं । चेहरे की नस की पहचान की जाती है और कोक्लियर का उपयोग करने के लिए उनके बीच एक रास्ता बनाया जाता है और इसमें इंप्लाट इलेक्ट्रोड्स को फिट कर दिया जाता है । इसके बाद एक इलेक्ट्रोनिक डिवाइस जिसे रिसीवर कहते हैं , उसे कान के पीछे के हिस्से में चमड़ी के नीचे लगा दिया जाता है और चीरा बंद कर दिया जाता डिवाइस जिसे रिसीवर कहते हैं , उसे कान के पीछे के हिस्से में चमड़ी के नीचे लगा दिया जाता है और चीरा बंद कर दिया जाता है । इसमें कितना समय लगता है ? कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी में बमुश्किल 2 से 4 घंटे का वक्त लगता है , यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है । सर्जरी करने वाले डॉक्टर सर्जरी के बारे में आपको विस्तार से सब कुछ समझा देंगे । इप्लांट सर्जरी के बाद क्या होता है ? आपको दर्द प्रबंधक दवाएं दी जाएंगी और आपकी अस्पताल से छुट्टी इस आधार पर होगी कि आप में सुधार किस तरह हो रहा है आपको बाद के दिनों में दिखाने के लिये कब कब आना है इसके बारे में बताया जाएगा । चार से छः सप्ताह के बाद इस डिवाइस का बाहरी भाग लगाया जाएगा कि डिवाइस के इस बाहरी भाग का उपयोग कैसे करते है और इसका रख रखाव कैसे किया जाता है । आपको सलाह दी जा सकती है कि आप स्वीच लैग्वेज थेरेपिस्ट या ऑडियोलॉजिस्ट के पास जाए । कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी सामान्य रूप से बेहोश करके की जाती है । सर्जन कान के पीछे स्थित मस्तूल की हड्डी को खोलने के लिए एक चीरा लगाते है । चेहरे की नस की पहचान की जाती है और कोक्लियर का उपयोग करने के लिए उनके बीच एक रास्ता बनाया जाता है । और इसमें इंप्लांट इलेक्ट्ड्स को फिट कर दिया जाता है । बहरेपन से ग्रसित लोगों के बीच अक्सर कोक्लियर इंप्लाट शब्द बहुत ही चर्चित है । हम में से • अधिकाष लोग इस उपकरण की कार्यषैली और इससे संबंधित प्रक्रियाओं से अनजान है । यही जानकारी का अभाव होने के कारण इस विषय से जुड़ी गलत धारणाएं पैदा होती है । सच्चाई यह है कि कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी कर्णावती प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा पूरी तरह से सुरक्षित है । आज अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के वरि . ई एन टी सर्जन डॉ पी पी मिश्रा ने दो मरीजों की कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी की । उक्त सर्जरी में डॉ हेतल मेहता , मुम्बई व समस्त अपोलो टीम शमिल रही ।

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