बिलासपुर-भारत सरकार द्वारा भारत के राजपत्र 06.09.1950 को पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश राज्य हेतु अनुसूचित में प्रथमतः प्रकाशित की गयी , जिसके अंतर्गत 31 अनुसूचित जनजाति के रूप में शामिल किया गया । 11/02 Date : 11 ( असाधारण ) में दिनांक जनजाति की सूची राजपत्र जनजातीय समुदायों को भारत सरकार द्वारा जारी 1950 की अनुसूचित जनजाति की अधिसूचना में 29.10.1956 को संशोधन करते हुए पूर्ववर्ती म.प्र . राज्य हेतु अनुसूचित जनजाति की सूची राजपत्र में प्रकाशित की गई । तत्पश्चात भारत सरकार द्वारा 20.09.1976 को विभिन्न राज्यों के साथ पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश राज्य हेतु अनुसूचित जनजाति संशोधन आदेश अधिनियम , 1976 भारत के राजपत्र में अंग्रेजी एवं हिन्दी में सूची जारी की गई । 01 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश राज्य से पृथक करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया । मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य हेतु अनुसूचित जनजाति की सूची जारी की गयी है । संविधान ( अनुसूचित जनजाति ) आदेश , 1950 भारत सरकार का राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 06.09.1950 में भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के माध्यम से समय – समय पर विभिन्न जनजातियों के प्रस्ताव राज्य शासन द्वारा जनजाति की सूची में सम्मिलित करने हेतु भेजे गये हैं । इनमें – 1. सौंरा , संवरा ( अनुक्रमांक 40 पर ) 2. भूईया भूईयां भूयां ( अनुकमांक 09 पर ) 3. धनुहार धनुवार ( अनुकमांक 14 पर ) 4. किसान ( अनुक्रमांक 32 पर ) 5. धांगड़ ( अनुक्रमांक 33 पर ) अनुसूची में जोड़ने हेतु केन्द्रीय केबिनेट द्वारा दिनांक 25.05.2016 को मान्य किया गया है । इसी तरह केन्द्रीय केबिनेट द्वारा दिनांक 13.02.2019 को उक्त जातियों के साथ ही अनुक्रमांक 43 में बिझिंया को अनुसूची में जोड़ने हेतु मान्य किया गया है , परन्तु इनकी अधिसूचना भारत के राजपत्र में होना शेष है । संसद से विधेयक पारित होने के उपरांत ही यह संभव अतः यह आवश्यक होगा कि भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय को इस संबंध में शीघ्र कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया जाए।
इसी तरह भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय को अनुसूचित जनजाति की सूची में मात्रात्मक / वर्तनी त्रुटि के निराकरण हेतु राज्य शासन द्वारा प्रस्ताव प्रेषित किया गया है , जिसे भारत के महारजिस्ट्रार द्वारा मान्य किया जाकर राष्ट्रीय जनजातीय आयोग को प्रेषित किया गया है और यह अग्रिम कार्यवाही के अभाव में अधिसूचित होना शेष है । यह निराकरण के प्रस्ताव निम्नानुसार है Inclusion of कोड़ाकू along with कोडाकू as variant Devanagari version of Kodaku at SL . No. 27 in STs list 1 . of State . 3 . 4 . 5 . 6 . 7 . 1/2/1 Inclusion of कोंद ( Kond ) along with कोंघ ( Kondh ) at SL . No. 23 in STs list . Correction of भारिया as भरिया without changing its English version name Bharia at SL . No. 5 in STs list .. Inclusion of पंडो , पण्डो / पन्डो at SL . No. 5 in STs list . Inclusion of गोंड़ and गोंड at SL . No. 16 in STs list . Inclusion of गदबा at SL . No. 15 in STs list without change in English text . Inclusion of ‘ नगवंसी / नगवन्सी , नागबंसि , नगबंसी , नगवासी , नागबसि and नगबसी as synonyms of नागवंशी ( Nagwanshi ) at SL . No. 16 in STs list of the State . इस तरह उपरोक्त सात जनजातियों के संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग को इस संदर्भ में निर्देशित करना उचित होगा । छत्तीसगढ़ राज्य के उपरोक्त जाति वर्ग के नागरिकों को इस अंतिम चरण के प्रक्रिया में अधिक अन्तराल के बाद भी निराकरण नहीं होने के कारण अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है । यह चिन्ता का विषय है । मैं उम्मीद करता हूँ कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आपके माध्यम से संबंधितों को आवश्यक निर्देश दे दिये जायेंगे

